चाँद भी शायद बेरोज़गार हो गया है,
आज की डिजिटल दुनिया में चाँद भी शायद बेरोज़गार हो गया है… 🌙 मोबाइल की चमक में उसकी ठंडी-ठंडी छुअन कहीं खो गई है, सुबह की वो हल्की, सुकून भरी हवा जो दिल को गुदगुदा जाती थी… अब महसूस ही नहीं होती। इंटरनेट की तेज़ रफ्तार में प्रेम का वो प्यारा एहसास भी कहीं गुम हो गया है… कमी तो कुछ भी नहीं है, फिर भी हम कहीं न कहीं अधूरे से हो गए हैं। न दोस्तों की महफिलें सजती हैं, न प्रेम की किताबें अब छपती हैं… सोचती हूँ, कैसे बुनूँ एक मीठी-सी प्रेम कहानी, जब दिलों को छूने वाले एहसास ही खो गए हैं। बाग़ आज भी फूलों से भरे हैं, हवाओं में अब भी खुशबू है… पर सूनी पड़ी हैं वो पगडंडियाँ, जो किसी के आने का इंतज़ार करती थीं… अब तो कागज़ के फूलों से आती है एक बनावटी खुशबू, और लोग दीवाने हैं कुछ झूठी मुस्कानों के पीछे — जहाँ इश्क़ का एक नकली दरबार सजा हुआ है… सच में… फुर्सत नहीं है, या शायद अब किसी को किसी की ज़रूरत ही नहीं रही… 💔 Writer- Alpna singh








