प्रेम किताबों में ही अच्छा लगता है,
प्रेम किताबों में ही अच्छा लगता है प्रेम हमेशा किताबों में अच्छा लगता है, सही मायनों में — प्रेम समर्पण में अच्छा लगता है। पर जीवन जीने के लिए समझौते भी ज़रूरी होते हैं। हर पल किसी की याद में सपने सजोते रहने से जीवन कहाँ गुजरता है? हर समय की गई मीठी बातों से पेट कहाँ भरता है? जीवन की धूप में कड़वी सच्चाइयों से गुज़रना ही पड़ता है। क्षणिक बाह्य सौंदर्य का दर्पण मोहभंग होते ही टूट जाता है। अंतर का मैल हर दिन साफ़ करना पड़ता है। यदि तुममें साहस हो — तभी करना किसी से प्रेम। यदि पी सको उसकी आँखों की मदिरा के संग उसी आँखों से निकले आँसू भी… यदि सह सको रात की सुगंधित साँसों के साथ सुबह की थकान भरी साँसें भी… तभी करना प्रेम। वरना रहने देना उसे हृदय की गहराइयों में कैद। रख लेना उसे नज़रों तक सीमित। सहेज लेना डायरी के पन्नों तक। क्योंकि सच यही है — प्रेम किताबों में ही अच्छा लगता है। प्रेम को किताबों में ही रहने देना। ✍️ अल्पना सिंह © मौलिक रचना #HindiPoetry #Prem #LovePoetry #HindiKavita #HindiShayari #TrueLove #LifeTruth #EmotionalPoetry #DeepPoetry #HindiWriter #IndianWriter #Poetr...











