सच्चे प्यार की कसौटी ,
सच्चे प्यार की कसौटी
आज रजत जैसे ही घर
लौटे, उन्होंने शिप्रा से समीर के बारे में बात
की। यह सुनकर शिप्रा का दिल जैसे थम सा गया। वह कुछ पल के लिए पूरी तरह से चुप हो
गई, और उसकी सोच पूरी तरह से शून्य हो गई।
रजत ने धीरे से शिप्रा के कंधे पर हाथ रखा और कहा, "मुझे पता है, शिप्रा, समीर के बारे में
जानकर तुम चौंकी हो, क्योंकि वह तुम्हारा बचपन का दोस्त
है।"
यह सुनकर शिप्रा
और भी चौंक गई। वह कुछ पूछने ही वाली थी कि रजत ने आगे कहा, "समीर मेरा पेसेंट है, और उसने ही मुझे तुम्हारे बारे में बताया
कि तुम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़े थे।" यह सुनकर शिप्रा ने राहत की सांस ली।
रजत ने कहा, "शिप्रा, समीर से मिल लो, वह तुमसे मिलना चाहता है।" शिप्रा बिना कुछ कहे सिर
हिलाकर हां में जवाब देती है।
कुछ दिन पहले, शिप्रा ने बाजार में समीर को देखा था। वह
बहुत कमजोर और थका हुआ सा दिख रहा था। लेकिन आज जो खबर सुनी, उसने शिप्रा को सोचने और समझने की शक्ति
ही छीन ली। कॉलेज के वो पुराने दिन जैसे चलचित्र की तरह उसकी आँखों के सामने घूम
गए।
कॉलेज की एक याद
ताजा हो जाती है, जब समीर ने पहली बार सिगरेट पीना शुरू
किया था। शिप्रा ने चिढ़ते हुए कहा, "समीर, तुमने सिगरेट शुरू
कर दी!”
समीर हँसते हुए
जवाब देता है, "अरे यार, एक दो सिगरेट पीने से मेरा फेफड़ा नहीं खराब हो
जाएगा!" इतना कहकर समीर खिलखिला कर हँसने लगता है। फिर तो यह उसकी रोज़ की
आदत बन जाती है और धीरे-धीरे शराब भी पीने लगता है। शिप्रा जब भी उसे सिगरेट या
शराब पीते देखती, उसे टोकती, लेकिन समीर हर बार उसकी बातों को मजाक में उड़ा देता।
फिर कुछ दिनों से
समीर की तबियत खराब रहने लगी। फिर भी समीर ने सभी दोस्तों को पार्टी दी, जिसमें शिप्रा भी आई। शिप्रा ने समीर को
फिर से सिगरेट पीते देखा और बोली, "समीर, तुम फिर से सिगरेट पी रहे हो, क्या यार, दूसरों का ख्याल किया करो!"
समीर सिगरेट को
मुंह से निकालकर जमीन पर फेंकता है और उसे अपने पैरों से कुचलते हुए कहता है, "ओह, सॉरी!" फिर वह दोनों हाथ ऊपर करते हुए बोलता है, "सॉरी, एवरीबडी!" वहां खड़े सारे दोस्त हंसने लगते हैं, लेकिन शिप्रा हंस नहीं पाती। वह चुपचाप
खड़ी रहती है।
पार्टी के बाद, शिप्रा धीरे-धीरे समीर के पास जाती है और
कहती है, "समीर, मेरी एंगेजमेंट फिक्स हो गई है।" समीर उसकी बात सुनकर
एक पल के लिए चुप हो जाता है और फिर रोते हुए कहता है, "ओह, शिप्रा, तुम ऐसा कैसे कर
सकती हो? तुम मुझे छोड़कर किसी और से शादी कैसे
सोच सकती हो? तुम मेरे साथ बेवफाई नहीं कर सकती!"
शिप्रा को समीर के
मुंह से यह सुनकर खुशी होती है, क्योंकि शायद वह
यही सुनना चाहती थी। लेकिन फिर समीर हंसी में बिखरते हुए कहता है, "सॉरी, सॉरी शिप्रा! मैं मजाक कर रहा था। पर इसमें मेरी नहीं, तुम्हारी भी गलती है। तुम ऐसे घबराकर बोल
रही हो जैसे कुछ गलत हो रहा है। शादी तो तुम्हारी खुशी की बात है, मैं जरूर आऊँगा।"
समीर की यह बात
शिप्रा का दिल तोड़ देती है, लेकिन फिर भी वह
जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहती है, "समीर, तुम भी ना, मजाक कब बंद करोगे, पता नहीं!" वह खुद को संभालते हुए समीर से विदा ले
लेती है। शिप्रा सोचती है, "शायद समीर के लिए मेरा प्यार एकतरफा था।
उसके दिल में मेरे लिए कुछ नहीं था, फिर भी वह मेरा पहला प्यार था, है, और रहेगा।"
समीर ने आज तक
उसके साथ प्यार का मजाक किया। क्या सच में प्यार अब सिर्फ एक खेल बनकर रह गया है? नहीं! मेरा प्यार कभी मजाक नहीं था। आज, मुझे समीर से यह जरूर पूछना है कि उसने
इतनी बड़ी बात मुझसे क्यों छुपाई।
शिप्रा की आँखों
में आँसू भर आते हैं। वह खुद को सँभाल ही रही थी कि तभी रजत कमरे में आता है और
बोलता है, "शिप्रा, चलो, मैं तुम्हें हॉस्पिटल छोड़ देता हूँ, मुझे आज डॉ. रंजन के घर जाना है, तुम्हें छोड़ते हुए वहां भी चला जाऊँगा।"
कुछ ही देर में
शिप्रा तैयार होकर रजत के साथ समीर से मिलने हॉस्पिटल पहुँचती है। समीर अपने बेड
पर लेटा हुआ था, बहुत कमजोर दिख रहा था। उसकी आँखों के
नीचे काले घेर थे और चेहरा पिला पड़ चुका था। शिप्रा धीरे-धीरे कमरे में दाखिल
होती है और बेड के पास रखे स्टूल पर बैठ जाती है। समीर के चेहरे पर हल्की मुस्कान
थी, लेकिन उस मुस्कान में भी बहुत दर्द था।
समीर को देख कर शिप्रा के आँखों में आँसू आ जाते हैं। समीर धीरे से मुस्कराते हुए
बोलता है, "कैसी हो शिप्रा? रजत के साथ खुश तो हो ना?"
शिप्रा ने आँसू
छिपाते हुए कहा, "हूँ, ठीक हूँ, रजत जी बहुत अच्छे
हैं, लेकिन तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो?"
समीर दर्द भरी
हँसी के साथ बोला, "ऐसे ही, तुम मेरी दोस्त हो, इसलिए। और तुम हमेशा हँसते रहो, इसीलिए तो मैंने..." समीर अपनी बात
पूरी किए बिना रुक गया।
शिप्रा के आँसुओं
का बांध टूट पड़ा। वह रोते हुए बोली, "क्यों समीर? इतनी बड़ी बात क्यों छुपाई तुमने मुझसे?"
समीर अनजान बनते
हुए बोला, "मैंने तुमसे क्या छुपाया?"
शिप्रा ने गुस्से
और दर्द से कहा, "यूँ अनजान बनने की कोशिश मत करो, समीर! तुम्हें भी मुझसे प्यार था, ये तुमने मुझसे छुपाया।"
समीर एक बार फिर
अनजान बनते हुए बोला, "तुम्हें भी! मतलब? तुम्हें भी मुझसे प्यार था? तुमने कभी बताया नहीं मुझसे।"
शिप्रा रुंधे गले
से बोली, "समीर... ये मजाक है तो बंद करो, यह मजाक बंद करो!"
समीर बोला, "शिप्रा, मजाक तो मेरी जिंदगी बन गई है।" समीर के चेहरे पर दर्द
साफ था। उसका हंसमुख और सुंदर चेहरा अब दर्द से स्याह पड़ चुका था। समीर दर्द भरी
आवाज में बोला, "और मैं अपने प्यार का कैसे मजाक बनने
देता? जब तक मुझे तेरे प्यार का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मुझे मेरी
मौत का फरमान मिल चुका था। मैं तुम्हें अपने साथ क्यों मरने के लिए जोड़ लेता?"
शिप्रा रुंधे गले
से बोली, "लेकिन समीर, मुझे एक बार तो बताते, तुमने ये मेरे साथ अच्छा नहीं किया?"
समीर गहरी सांस
लेते हुए बोला, "पता नहीं शिप्रा, मैंने क्या अच्छा किया और क्या नहीं, लेकिन मैं तो हमेशा उस पल को कोसता हूँ
जब मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी। तुमने हमेशा मुझे सिगरेट पीने से रोका, हमेशा मुझे शराब पीने से टोका, और मैंने तेरी बातों को मजाक में टाल
दिया। हमेशा तेरा मजाक बनता रहा, इसलिए तो आज मेरी
जिंदगी मजाक बन कर रह गई है। एक-एक पल मौत का इंतजार कर रहा हूँ..."
शिप्रा आँसू बहाते
हुए बोली, "समीर... जब तक तुम्हारे साथ थी, तब तुम्हारे मुँह से ये सुनना चाहती थी
कि तुम्हें मुझसे प्यार है, उस दिन तुमने ये बात नहीं बोली, फिर आज क्यों?"
समीर दर्द भरी
मुस्कान के साथ बोला, "सुना है, दिल की कोई बात अधूरी रह जाए तो उसकी आत्मा को शांति नहीं
मिलती। शायद मरने के बाद मेरी आत्मा तुम्हें परेशान करने न जाए, मैं तुम्हें परेशान नहीं देख सकता, बस इसलिए..."
शिप्रा रोते हुए
बस इतना ही बोल पाई, "समीर..."
लेखिका- अल्पना सिंह
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